सरकार का क्या होगा ये तो पता चल ही जायेगा पर .इस मुद्दे ने कई ऐसे प्रश्न उठाये है जिन पर गंभीरता से विचार करना जरुरी है...
१..क्या जेलो में गंभीर अपराधो में बंद सांसद परमाणु करार की गंभीरता को समझ सकेंगे क्या अब ये ही देश का भविष्य तय करेंगे ,क्या देश के प्रतिनिधियों का इस तरह बाहुबलियों की मदद लेना जनता के साथ धोखा नही?
२..क्या २-३ सांसदों वाले दलों को ये आज़ादी मिलनी चाहिए की वो सरकार को वोट के नाम पर ब्लाच्क्मेल कर सके॥
और लोकतंत्र की भावना के साथ खेल सके ?
३..क्या सरकार को इतने गंभीर मुद्दे पर विपक्ष और देश को विश्वास में नही लेना चाहिए था ?
४..क्या इस मुद्दे पर सरकार की अति-उत्सुकता से सवाल नही उठते ?
५.क्या सरकार की इस जल्दीबाजी से संसद को दो भागो में बाट नही दिया ?
६.क्या ये सही नही होता की इस गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे पर एक समिति बनाई जाती जिसमे देश के परमाणु वैज्ञानिको को शामिल रहते, विपक्ष और सभी दलों को विश्वास में लेकर सरकार आगे कदम बढाती ।
७..अगर इस तरह की तेजी नही दिखाई जाती तो देश को और देश के लोकतंत्र को अपमान से बचाया जा सकता था ..
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